Sunday, 20 January 2013

सब कुछ तो बिखर गया है!

लिखने की हर चाहत, मेरे दिल मे दफन हो चुकी है।
जिस कलम से मैं लिखता था, आज वो ही मेरी अर्थी है॥

जिन पन्नों पर कभी सिमट जाती थी कवितायें मेरी।
आज उसी को चिता समझकर, जला देंगे लोग लाश मेरी॥ 

हाँ! मैं मर चुका हूँ, मेरे अंदर का कवि भी मर गया है। 
खत्म हो चुकी है सारी चाहत, सब कुछ तो बिखर गया है॥ 

शैलेश कुमार बारमाटे (30/05/2004)

No comments:

Post a Comment